शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

सुन मैरा ठिकाणा,भारत म हरयाणा ,छोटा प्रदेश बडा है फैमश, सबते न्यारा म्हारा हरयाणा, छोटा प्रदेश पाछ्ये छोड दिये कई देश


(सोनू शर्मा) आज हरियाणा अपना 52 वां जन्मदिन मना रहा है। हरियाणा राज्य का जन्म 1 नवम्बर 1966 को हुआ था।इस से पहले हरियाणा पंजाब का हिस्सा था। जिसे 1966 में भारत के 27 वें राज्य के रूप में पहचान मिलीहरियाणा की राजधानी चण्डीगढ़ है जो कि भारत का सबसे सुंदर शहर माना जाता है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली हरियाणा से तीन ओर से घिरी हुई है।वर्तमान में खाद्यान और दुध उत्पादन में हरियाणा देश में प्रमुख राज्य है।इस राज्य के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है।1960 के दशक की हरित क्रान्ति  में हरियाणा का प्रमुख योगदान रहा जिससे देश खाद्यान सम्पन्न हुआ।
   




 हरियाणा भारत के अमीर राज्यों में से एक है और  प्रति व्यक्ति आय के आधार पर यह देश का दूसरा सबसे धनी राज्य है।इसके अतिरिक्त भारत में सबसे अधिक ग्रामीण करोड़पति भी इसी राज्य में हैं। हरियाणा आर्थिक रूप से दक्षिण एशिया का सबसे विकसित क्षेत्र है।भारत में हरियाणा यात्री कारों, दो पहिया वाहनों और ट्रैक्टरों के निर्माण में सर्वोपरी राज्य है।भारत में प्रति व्यक्ति निवेश के आधार पर वर्ष 2000 से राज्य सर्वोपरी स्थान पर रहा है।हरियाणा दिन प्रतिदिन अपनी प्रतिभा का लोहा विश्व भर में मनवा रहा है।   यह राज्य वैदिक सभ्यता और सिंधु घाटी सभ्यता का मुख्य निवास स्थान रहा है। इस क्षेत्र में विभिन्न निर्णायक लड़ाईयाँ भी हुई हैं।जिसमें भारत का अधिकतर इतिहास समाहित है। इसमें  महाभारत का महाकाव्य युद्ध भी शामिल है। महाभारत का युद्ध  कुरुक्षेत्र में हुआ (इसमें भगवान कृष्ण ने भागवत गीता का वादन किया)। इसके अलावा यहाँ तीन  पानीपत की लड़ाईयाँ हुई।
           

            हरियाणा नाम कैसे पड़ा
हरियाणा का शाब्दिक अर्थ "भगवान का निवास" होता है जो संस्कृत

शब्द हरि (हिन्दू देवता विष्णु) और अयण (निवास) से मिलकर बना 

है। मुनीलाल, मुरली चन्द शर्मा, एच॰ए॰ फड़के और सुखदेव सिंह 

छिब जैसे विद्वानों के अनुसार हरियाणा  में शब्द की 

उत्पति हरि (संस्कृत हरित, हरा) और अरण्य (जंगल) से हुई है।


                        


            खेलों में हरियाणा 


हरियाणा कि बात हो तो खेलो में हरियाणा का नाम कैसे पीछे रह सकता है।हरियाणा के खिलाडी न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी तिरंगा फहरा चुके है।हाल ही में हुई रियो ओलंपिक में देश की बेटी साक्षी मलिक भी रियों में तिरंगा फहरा चुकी है और प्रोफेशनल बॉक्सिंग में हरियाणा के भिवानी जिलें के युवा खिलाड़ी विजेन्द्र सिह ने पहली जीत हासिल की है।इसके अलावा हरियाणा में ही जन्मे योगेश्वर दत्त भी रेस्लिंग में अपना दम दिखा चुके है।सुशील कुमार रेस्लिंग,साइना नेहवाल बैडमिंटन,दिनेश कुमार,जगदीश सिंह,मनोज कुमार और विकास यादव बॉक्सिंग में अपना और अपने देश प्रदेश का नाम रोशन कर चुके है।
    








खेलों का जिक्र हो और क्रिकेट कि बात ना हो,क्रिकेट में हरियाणा कैसे किसी से कम रह सकता है।1987 विश्व कप जीतने वाले कपिल देव,चेतन शर्मा,पहला टी20 विश्व कप में जीत हासिल करने वाले जोगेन्द्र शर्मा और हाल ही में अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलविदा कहने वाले विरेन्द्र सहवाग भी हरियाणा जैसे छोटे से प्रदेश से है।विरेन्द्र सहवाग फिलहाल हरियाणा के लिए रणजी खेल रहे है।अजय रात्रा,अमित मिश्रा,आशिष नेहरा,नितिन सैनी,मनविंद्र बिसला,मोहित शर्मा। 



युजवेंद्र चहल हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले है उनके एडवोकेट पिता केके चहल का सपना था कि उनका इकलौता बेटा क्रिकेटर बने और इंडिया के लिए खेले। इसके लिए उन्होंने कम मेहनत नहीं की। खेत में पिच बनाकर बेटे को प्रैक्टिस कराया। स्टेडियम घर से दूर था और वहां पूरी सुविधाएं नहीं थीं। युजवेंद्र 6-7 साल की उम्र से क्रिकेट खेलने लगा था। पढ़ाई में मन लगता नहीं था।2004 में क्रिकेट के प्रति उसका लगाव देखकर मैंने अपने डेढ़ एकड़ खेत में उसके लिए पिच बनवाई। यहीं वह सुबह-शाम प्रैक्टिस करता था।2011 तक उसने खेत में ही प्रैक्टिस की। जब उसका अंडर-19 में सिलेक्शन हुआ तो मुझे पहली बार लगा कि एक दिन हमारा सपना जरूर सच होगा।युजवेंद्र लेग स्पिनर होने के साथ एक उम्दा ऑलराउंडर भी हैं। 



हिमाचल के खिलाफ रणजी में 152 रनों की यादगार पारी खेल चुके हैं।आईपीएल के इस सीजन में तो अब तक के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।बेटे की सफलता से खुश माता- पिता ने कहा, ‘आखिर युजवेंद्र की मेहनत रंग लाई। हमारा सपना बस पूरा होने को है,19 विकेट लेकर आईपीएल के इस सीजन में अब तक नंबर वन गेंदबाज।11मैच खेले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए।2015 में भी आरसीबी के सबसे अधिक विकेट लेने वाले बॉलर रहे।उस सीजन में 15 मैचों में 23 विकेट लिए थे।ओवरऑल आईपीएल सीजन के तीसरे बेस्ट बॉलर बनें। 

देश का राष्ट्रीय खेल माना जाने वाला हॉकी में भी हरियाणा के युवा किसी से कम नही है।जसजीत कौर हांडा,ममता खर्ब,प्रतीम रानी सिवाच,सदींप सिंह सैनी,सीता गुसीन,सुमन बाला,सुरेन्द्र औरे सविता पुनिया आदि खिलाडी हरियाणा की तरफ से हॉकी खेल चुके है।

          

     हिंदुस्तान का GOOGLE BOY है 6 साल का                                     कौटिल्य

हरियाणा  के करनाल जिले के कोहण्ड गांव का रहने वाल करीब छह साल बालक कौटिल्य अद्भुत दिमाग का धनी है। कौटिल्य देश-विदेश के भूगोल और सामान्य ज्ञान के बारे में ऐसे बताता है कि बड़े-बड़े के छक्के छूट जाएंगे।इस बालक की उम्र अभी सिर्फ 5 साल आठ महीने ही है, लेकिन उससे कहीं से कुछ भी पुछ लो, वह उस सवाल का एक दम सटीक जवाब देता है। कौटिल्य को दुनिया के देश और प्रदेश की जानकारी जुबानी याद है।पहली क्लास में पढ़ने वाला कौटिल्य से किसी भी नदी, पहाड़, राज्य, नामचीन हस्तियों आदि के बारे में पूछने पर, वह पलक झपकते ही उसका जवाब दे देता है।




         धरती से आसमान तक हरियाणा
 हरियाणा की बेटी कल्पना चावला का नाम कौन भुल सकता है।जिसने तिरंगे को न सिर्फ जमीन पर बल्कि आसमान में भी फहरा कर अपने देश का नाम रोशन कर दिया।जिससे ये पता चलता है कि हरियाणा की बेटियां भी किसी से कम नही है।वही हरियाणा की एक बेटी सतोंष यादव भी है जो माउंट एवरेस्ट पर तिंरगा फहरा चुकी है।



              
              'बॉलिवुड' में हरियाणा

गंगाजल फिल्म में सुंदर यादव के नाम से फेमस यशपाल शर्मा हरियाणा के हिसार से है।जिन्होने बोलीवुड की काफी फिल्मों में काम किया है।फिल्म अभिनेत्री जूही चावला,मल्लिका सेहरावत,सुनील दत्त,जगत जाखड़,जयदीप अहलावत,मनीष जोशी बिसमिल,ओमपुरी,परिणीति चोपड़ा,राजकुमार राव,रणदीप हुडडा,उषा शर्मा,यश टोंक,विजय वर्मा,गजेन्द्र फोगाट,विकास शर्मा और हाल ही में हिट फिल्म मेसेंजर आफॅ दा गाड़ॅ देने वाले संत गुरमीत राम रहीम सिंह भी हरियाणा से है।जो कि बॉलिवुड में हरियाणा के नाम की धुम मचा चुके है।


वहीं मशहूर गीतकार भाजे भगत,संत गुरमीत राम रहीम सिंह,गजेन्द्र वर्मा,गुलाम फरीद साबरी,जसराज पड़ित,लक्ष्मी चंद और जाने माने सिंगर सोनू निगम भी हरियाणा में ही जन्में है।


             
              सफल उघोगपति

नवीन जिंदल,सुभाष चन्द्रा,सजन जिंदल,चेती लाल वर्मा और समीर गुलाटी,बाबा रामदेव जैसे सफल बिजनसमैन भी हरियाणा से ही है।जो कि काफी लोगों को रोजगार मुहेया करवा रहे है।

    
      नेतागिरी में भी हरियाणा किसी से कम नहीं,
       दो देशों के पूर्व प्रधानमंत्री भी म्हारे,
बात देश पर राज करने कि हो तो वहां भी हरियाणा किसी से कम नही है।देश के उप-प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल,विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जो कि पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रह चुकी है और 25 साल की कम उम्र में मंत्री बनने का रिकार्ड भी उन्ही के नाम है।


          
पूर्व सेना अध्यक्ष व जनरल वीके सिंह यू.पी के गाजियाबाद से सांसद है और मोदी कैबिनेट विदेश राज्य मंत्री है।बीरेन्द्र सिंह ग्रामीण विकास मंत्री और राव इन्द्रजीत सिंह भी मोदी कैबिनेट का हिस्सा है।


एतिहासिक जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी के सयोंजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हरियाणा के सिवानी से है।दिल्ली विधानसभा में 10 से 15 ऐसे विधायक है जिन्होनें हरियाणा कि धरती पर जन्म लिया है।


इसके अलावा हरियाणा के पहले और पूर्व मुख्यमंत्री पडिंत भगवत दयाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेन्द्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री बसींलाल, पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडडा और देश के सबसे कम उम्र के सासंद दुष्यंत चौटाला आदि हरियाणा से ही है जो कि केन्द्र में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते है।


         

           विदेशों में भी किया नेतृत्व

पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री नवाबजादा लियाकत अली खान,फिजी के पूर्व प्रधानमंत्री महेंद्रा चौधरी,पाकिस्तान के पूर्व रक्षामंत्री राव सिकंदर इकबाल और हाल ही में नार्वे में मंत्री बनी अंजु चौधरी भी हरियाणा से ही है।





             बार्डर पर हरियाणा

जब बात देश कि रक्षा करने की हो तो हमारे हरियाणा के जवान यहां भी किसी से कम नही है।सेना में हर दसवां जवान हरियाणा से है।कारगिल युद्ध में भी हरियाणा अपना दम दिखा चुका है।हरियाणा से सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के रिटायर होने के बाद हरियाणा में ही जन्मे सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 

रविवार, 25 अक्टूबर 2015

गाय से गंदगी तक राजनीति

ये फ़ोटो देश की राजधानी दिल्ली का है। इस फोटो में दिल्ली के पत्रकार आपको कूड़े के ढेर या सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से फ़ैली गंदगी दिखा रहे होंगें।मै आपको यहाँ गाय के हालात दिखाना चाहता हूँ।गायों की ये हालात वहां की है जहाँ गाय के नाम पर राजनीति करने वाली बीजेपी का हेड ऑफिस,आरएसएस,विश्व हिन्दू परिषद और काफी गौशाला यहाँ मौजूद है।सबसे बड़ी बात तो दादरी में जा कर राजनीति करने वाले अरविंद केजरीवाल भी यहां के मुख्यमंत्री है।
मै पूछना चाहता हूँ इन्होंने दिल्ली में गायों के लिए क्या किया है ?
ये लोग सिर्फ गाय के नाम पर राजनीति करते है।
आजकल इनकी राजनीति
दाल
दलित
धर्म
दंगा
पर आकर रुक गई है।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

माँ की दुआ आई काम

विजेंदर कुमार के हरियाणवी मुक्के के आगे ढेर हुआ सोनी वाइटनिंग।आज अपना पहला प्रोफेशनल मैच खेल रहे हरियाणा के रहने वाले विजेंदर कुमार ने किसी को एहसास ही नही होने दिया कि वो जिंदगी में पहली बार प्रोफेशनल रिंग में उत्तर रहे हैं।विजेंदर कुमार ने बड़ी ही आसानी से हरा दिया सोनी वाइटनिंग को| मैच को बीच में ही रोक रेफरी को करना पड़ा विजेंदर कुमार को विजेता घोषित-विजेंदर के मुक्के के आगे मैच का वक्त खत्म होने से पहले ही चित हुआ पॉलैंड का रेसलर सोनी वाइटनिंग| माँ की दुआ आई काम-विजेंदर ने मुकाबले से पहले अपनी माँ से कहा था कि माँ चिंता मत करना बस दुआ करना,विजेंदर की जीत के बाद पूरे हरियाणा समेत देश में उत्साह का माहौल|

रविवार, 4 अक्टूबर 2015

भीम सिहं मेरे साथी ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌.......


                                      एक थे भीम सिंह बडाला.......



                  

आज का ब्लॉग लिखते समय अपने आप को काफी दुःखी महसूस कर रहा हूँ क्योंकि कल हमारे साथी भीम सिंह बडाला हमें छोड़ कर चले गए।भीम सिंह एक निडर,निष्पक्ष व जिंदादिल पत्रकार थे। भीम सिंह करीब 15 वर्षो से नारनौंद व हाँसी में पत्रकारिता कर रहे थे।पिछले 5 वर्षो से ए वन तहलका,खबरें अभी तक,ईटीवी और टोटल टीवी से जुड़े हुए थे।  इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया में अपनी छाप छोड़ने वाले भीम सिंह का शनिवार को उनके गाँव बडाला में निधन हो गया। मुझे ये जानकर बड़ी हैरानी हुई कि भीम सिंह का निधन कैंसर की बीमारी के कारण हुआ है।जिस इंसान ने कभी भी कोई नशे की चीज का प्रयोग नहीं किया हो उसको कैंसर हो जाएं।मुझे आज भी याद है, जब मै भीम सिंह के साथ घर आते समय उनकी गाड़ी में बैठ कर आया था.… तो खरकड़ा गाँव के एक आदमी ने गाड़ी में बीड़ी जला ली थी तो भीम सिंह ने उनको गाड़ी से ही उतार दिया था।दूसरी घटना जब मुझे किसी ने बताया कि आज भीम सिंह के साथ बस में बाँस गाँव के लड़के ने झगड़ा किया है तभी मैने उनके पास कॉल कि तो पता लगा कि वो झगड़ा भी सिगरेट को लेकर ही हुआ था।कल से यही सोच कर हैरान हूँ कि जिस इंसान को नशे से इतनी नफरत हो उसको कैंसर कैसे हो सकता है ?

           जब मै हाँसी में टीवी 24 के लिए काम करता था, तब मुझे भीम सिंह के साथ 2 महीने काम करने का मौका मिला था।उसके बाद मै नारनौंद चला गया था।उनका काम करने का तरीका भी काफी अलग ही था वो एक साथ कई - कई स्टोरी कवर करते थे।हाँसी में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वो इकलौते ऐसे पत्रकार थे जो काफी पुराने व कई न्यूज़ चैनलों से जुड़े हुए थे।उन्होंने हमेशा ही सच का साथ दिया इस कारण उनके विरोधी भी ज्यादा थे।वो ग्रुप की बजाय अकेले ही काम करने में विश्वास रखते थे। भीम सिंह के ऐसे छोड़ कर चले जाने से पत्रकारिता जगत को कितनी हानि हुई है इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

          अब तो बस इस बात का दुःख है कि अगर मुझे ये पता चल जाता की भीम सिंह बीमार है तो मै उनसे मिलने जरूर जाता।क्योंकि मै पिछले 3 महीने से दिल्ली हूँ इस कारण मुझे पता नही चला।अब भगवान से यही प्रार्थना है कि भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को इस दुःख की घड़ी में सहनशक्ति दे।

रविवार, 20 सितंबर 2015

हरियाणा के हिसार की अंजू नार्वे में बनी विधायक।33 वर्षीय अंजू का मंत्री की दौड़ में भी आगे चल रहा है नाम।मेरा दिल आज भी हिंदूस्तान में रहता है-अंजू

अपने देश में सीखे संस्कार और मेहनत -अंजू
(हरियाणा)हिसार की बेटी अंजू चौधरी नार्वे में एफआरके पार्टी (फ्रेमस्क्रिप्ट्स पार्टी) की विधायक बन गई हैं। वेस्ट अगडर राज्य के घोषित हुए चुनाव परिणामों में पहली ही बार चुनाव लड़ी 33 वर्षीय अंजू विजयी रहीं। फिलहाल इनका नाम मंत्री पद की दौड़ भी चल रहा है। वहीं, हिसार में भी परिजनों में खुशी का आलम है। अंजू अपने पति हाकुन मनरेक के साथ हिसार आ रहीं हैं।
हिसार के गवर्नमेंट कॉलेज से ग्रेजुएट करने वाली अंजू के पिता रामप्रताप सहारण एचएयू के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। अंजू के नार्वे तक का सफर भी रोचक है। खुद अंजू ही पूरी कहानी बताते हुए कहती हैं कि उनकी बड़ी बहन मंजू चौधरी अपने पति आजाद नगर निवासी निवासी राजेश बुडानियां नार्वे में ही रहती हैं। साल 2006 में वह अपनी दीदी के पास घूमने गई थीं। वहीं एक बर्थ डे पार्टी में पहली बार एक कंपनी संचालक हाकुन मनरेक से मुलाकात हुई। जबकि 2007 में छुट्टियों में फिर नार्वे गई तो इस बार हाकुन से शादी करने का फैसला लिया। परिवार की सहमति के बाद भारतीय रीति-रिवाज के हिसाब से भारत में ही शादी की। शादी के बाद से ही नार्वे में रह रहीं हैं। वहां रहकर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री भी की।
अपने देश में सीखे संस्कार और मेहनत
अंजू का कहना है कि इंडिया की दो विशेषताएं हमें अन्य देशों से अलग करती हैं। इसमें एक है हार्डवर्क और यहां के संस्कार। नार्वे में भ्रष्टाचार नहीं है, यही खूबी वहां की राजनीति की है। खुद अंजू मानती हैं कि मैंने चुनाव में अपना एक भी रुपया खर्च नहीं किया, क्योंकि नार्वे में पार्टी ही पैसा देती है।
अपनी बहनों को किया मिस
अंजू कहती हैं कि मैं बेशक नार्वे में बस गई हूं, लेकिन मेरा दिल आज भी इंडिया में रहता है। इसलिए जीत के बाद अपने परिवार को हिसार में बिताए दिनों काे याद करना नहीं भूली। इनका कहना है कि सभी बहनें शादीशुदा हैं। इसमें संजू विद्युत नगर में अपने पति जेपी बुडानिया, जबकि एक बहन मनीष की शादी ललित चौधरी से हुई है।
राजनीति में थी रुचि इसलिए पार्टी ज्वाइन की
अंजू ने शादी के बाद स्टेट ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन में जॉब करती थीं। इससे पहले उन्होंने एक बैंक में भी नौकरी की। राजनीति में रुचि होने के कारण पार्टी भी कुछ साल पहले ही ज्वाइन की थी। परिवार और पति का पूरा सपोर्ट रहा। अपनी मां कलावती के हाथ का खाना खाना अौर घूमने का इन्हें बेहद शौक है।

शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड से भी सम्मानित है अजय लोहान  लेफ्टिनेंट , डॉक्टर व इंजीनियर बन कर रहे है देश सेवा   

अध्यापक दिवश पर स्पेशल स्टोरी    
सलाम ऐसे जज्बे को  ..................     
मिशाल: शिक्षा के क्षेत्र में बनाया अलग मकाम
एक अध्यापक जिसने बदल दिए सरकारी स्कूल के मायने
जो बच्चे पहले हिंदी भी ठीक से नहीं बोल पाते थे, आज वे बोलते है फर्राटेदार अंग्रेज़ी ।अपनी तनख्वाह बच्चों की प्रतिभा पर खर्च करता है यह टीचर 
हर साल दस लड़कियों को पढ़ाता है अपने खर्चे से 
निरक्षर लोगों को भी दे चुके है अक्षर ज्ञान। हरियाणवी संस्कृति को बचाने के लिए भी जंग लड़ रहा है नारनौंद का अजय लोहान। 
    हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड से भी सम्मानित है अजय लोहान 
लेफ्टिनेंट , डॉक्टर व इंजीनियर बन कर रहे है देश सेवा   
(हिसार हरियाणा) सात वर्ष पहले हिसार जिले के कस्बे नारनौंद के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में अजय लोहान का चयन गेस्ट टीचर के रूप में हुआ था। पहले दिन जब वे स्कूल पहुँचे, तो कुछ बच्चों ने उन्हें हरियाणवी में नमस्कार किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ में आया कि कुछ बच्चों को छोड़ तमाम बच्चे स्कूल में हरियाणावी को ही मुख्य भाषा के रूप में उपयोग कर रहे थे। अजय अंग्रेज़ी के अध्यापक थे और जब उन्होंने बच्चों को अंग्रेज़ी पढ़ाना शुरू किया, तो एक भी बच्चा ठीक से न तो समझ पाया और न ही उनके द्वारा पढ़ायी गयी चीज़ों को दोहरा पाया। यह सब देखकर अजय हैरान रह गये। रह-रह कर उनके मन में यही बात घूमती रही कि अंग्रेज़ी के मामले में शहरों के बच्चों के मुकाबले ग्रामीण बच्चे कितने पीछे हैं। शहरी बच्चे जहाँ अच्छे से इंग्लिश बोल लेते हैं, वहीं उनके स्कूल के बच्चे ठीक से हिंदी भी नहीं बोल पा रहे थे। बस फिर क्या था, अजय ने इस बारे में कुछ करने की ठान ली। अजय ने अपने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों पर खूब मेहनत करनी शुरू की। धीरे-धीरे अजय की मेहनत रंग लाने लगी। जिस स्कूल के बच्चे अंग्रेज़ी समझ भी नहीं पाते थे , अब वे अंग्रेज़ी में बात करते हैं। बच्चों और शिक्षकों की मेहनत से स्कूल के परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है। नारनौंद के रहने वाले 30 वर्षीय अजय लोहान ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने का काम किया है। ग्रामीण आंचल से होते हुए भी अजय लोहान ने इंग्लिश विषय को लेकर बच्चों पर ऐसी मेहनत करी कि आज उनकी प्रतिभा के क्षेत्र में खूब चर्चे हैं। अजय के जिस स्कूल में जहाँ पहले 400 बच्चे पढ़ते थे, वहीं अब यह आंकड़ा  1622 तक पहुँच गया है।
बच्चों पर खर्च करते हैं अपनी तनख्वाह -
बच्चों के सर्वांगीण विकास में जुटे अजय लोहान पिछले 8 सालों से स्कूल से मिलने वाली अपनी तनख्वाह को बच्चों पर ही खर्च कर देते हैं। अजय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "मैं बस स्कूल का पैसा स्कूल पर व बच्चों पर ही लगा देता हूँ। जो बच्चे पैसे की कमी की वजह से स्कूल की किताबें या स्टेशनरी नहीं ले पाते उनके लिये ज़रूरी चीज़ें खरीद लेता हूँ।"  इसके अलावा अजय लोहान अपनी तनख्वाह को बच्चों की प्रतियोगिता करवाने में भी खर्च करते हैं। इस बारे में अजय बताते हैं कि 2001 में वे जींद के कॉलेज से बीए कर रहे थे, कॉलेज की तरफ से उनका नाम एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए भेजा गया। वहाँ 50 में से 47 नंबर मिलने के कारण वो पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गए। वापस आने के बाद कॉलेज के अध्यापकों ने अजय को बताया कि अगर शुरू से ही तैयारी की होती, तो ऐसा न होता। बस उसी दिन से अजय ने ठान लिया कि जैसा उनके साथ हुआ है, वैसा उनके क्षेत्र के किसी भी ग्रामीण बच्चें के साथ नहीं होगा। 2001 से ही अजय भाषण, कविता लेखन, खेल, जनरल नॉलेज, डांस सहित सैकड़ों प्रतियोगिताओं का आयोजन करवा रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही अजय द्वारा प्रशिक्षित टीम ने जिलास्तर पर आयोजित युवा संसद में पहला स्थान प्राप्त किया।
        कई पुरस्कारों से सम्मानित हुए अजय  - नारनौंद निवासी अतिथि अध्यापक अजय लोहान ने ऐसी मिशाल कायम की है जिसकी रोशनी से विद्यार्थियों की राह सदैव रोशन होती रहेगी। छोटे से कस्बे में शिक्षा रुपी रोशनी की मशाल लेकर निकले अध्यापक अजय लोहान ने सबसे कम उम्र में वो कर दिखाया है जो दूसरों के लिए महज कल्पना हो सकती है।अजय लोहान को उनके प्रयासों के लिए हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड , बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड व कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए गोल्ड़ मेडल मिल चुका है।
        ये है विशेष उपलब्धियां - अजय द्वारा पढ़ाए गए बच्चों के करियर की अगर बात करें तो उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चों ने  पिछले 7 सालों से सरकारी स्कूलों में लगातार जिले में पहला , दूसरा व तीसरा स्थान हासिल कर कभी न टूटने वाला इतिहास कायम किया है। इसके साथ साथ हर साल इनका परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है। और इनके दर्जनों बच्चे इंग्लिश विषय में सत प्रतिशत अंक हासिल कर चुके है। इनके 5 छात्र वर्ष 2013 में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए। इतना ही नहीं 3 बच्चे डॉक्टर, एक बच्चे का आई आई टी मुंबई में चयन , 34 बच्चे इंजीनियर बने और 122 बच्चों का चयन दिल्ली व पंजाब यूनिवर्सिटी में हुआ है। उनके द्वारा पढ़ाये गये 200 से भी ज़्यादा विद्यार्थियों को विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से छात्रवृति मिल चुकी है और 29 बच्चों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिल रही है। इनके द्वारा तैयार की गई युथ पार्लियामेंट की टीम ने 2 बार जिले में पाया प्रथम स्थान , विद्यालय सौन्द्रीयकरण में विद्यालय को दिलवाया गोल्ड मेडल और समय समय पर बच्चों को करवाते है शैक्षिक भ्रमण आदि।  इसके साथ साथ लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर साल 10 गरीब लड़कियों का अपने पैसों से पढ़ाते है।
        प्रसिद्ध कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस ने भी माना अजय लोहान के प्रयाशों का लोहा -  अजय लोहान के प्रयासों का लोहा प्रसिद्ध कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस ने भी माना है। अजय बच्चों को कंपनी के हेड ऑफिस लेकर गए थे, उस दौरान बच्चों की प्रतिभा से प्रभावित होकर और अजय के अनुरोध पर कंपनी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए 10 कंप्यूटर भी देने का फैसला लिया जिससे आज बच्चे तकनिकी शिक्षा का लाभ ले रहे है। इतना ही नहीं कंपनी ने उनके द्वारा किए गए अनुरोध पर 10 कंप्यूटर और देने की बात को स्वीकार कर लिया है।   
         पिता के पदचिह्नों पर चल रहे अजय - अजय लोहान  ने नारनौंद के जिस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में अपनी सेवाएँ दी हैं उनके पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं। अजय के पिता स्वर्गीय रामनिवास लोहान इसी स्कूल में राजनीती शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके हैं। अजय कहते हैं कि पिता से मिली प्रेरणाओं के चलते ही वे शिक्षक बने।
       कुर्शी से है सख्त नफरत - अजय लोहान पिछले 8 सालों से कभी भी कुर्शी पर नहीं बैठे है। क्लास में हमेशा खड़े रहकर पढ़ाने वाले अजय ने अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि वे शिक्षा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपना व अपने गाँव का नाम रोशन करना चाहते हैं। ग्रामीण आंचल के बच्चों को अच्छे पदों पर पहुँचाना भी उनका लक्ष्य है।
      हर साल 10 लड़कियों को पढ़ाते है अपने खर्चे पर - जिस मुहीम को हरियाणा सरकार ने आम शुरू किया है उस मुहीम को अजय लोहान पिछले कई सालों से चला कर बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रहे है।  गरीब लड़कियां शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए वो अपने खर्चे से 10 लड़कियों को पढ़ाकर अतुल्य कार्य कर रहे है जिससे बच्चे उन्हें अपना संरक्षण मानने लगे।
        हरियाणवी संस्कृति के संरक्षक भी है अजय लोहान - ऐसा नहीं है कि इस अध्यापक को केवल अंग्रेजी से ही लगाव है बल्कि नारनौंद निवासी अध्यापक अजय लोहान पिछले 14 सालों से हरियाणवीं संस्कृति के प्रसार व प्रचार में जुटे हैं। अकेला चलों की तर्ज पर अपने मिशन पर निकले अजय लोहान के साथ सैकड़ों संस्कृति प्रेमियों का कारवां है। 30 वर्षीय अजय लोहान अतिथि अध्यापक शिक्षा के प्रचार व प्रसार के साथ साथ वे अपने व्यस्थ समय में से समय निकालकर लोगों को पश्चिमी सभ्यता से बचाने के लिए हरियाणवीं संस्कृति के प्रति जागरूक कर रहें है। अजय लोहान अपने छात्र जीवन में मिलने वाले जेब खर्च की रकम को भी हरिणाणवीं संस्कृति को बचाने में जुटे हुए हैं। वे वर्ष 2001से हरियाणवीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हरियाणवीं संस्कृति का प्रसार कर रहें है। वे हरियाणवीं संस्कृति के प्रसार में लगे दूसरे हरियाणवीं कलाकारों को समय-समय पर सम्मानित भी करते रहते हैं। अजय लोहान विगत कई वर्षों से नाटक मंडली के माध्यम से भी ग्रामीणों को जागरुक कर रहें है। हरियाणवीं संस्कृति के परहेरी अजय लोहान क्षेत्र के लोगों में चर्चा का विषय तो बने ही हुए हैं। अजय लोहान को उनके इस सराहनीय कार्य के लिए हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड से भी नवाजा जा चूका है।
      इनसे हो चुके है सम्मानित - योगगुरु स्वामी रामदेव, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व मुख्यमंत्री  हुड्डा ,  शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ,राज्यसभा सांसद कुमारी सेलजा , पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्क्ल , पूर्व राजयपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा , डिप्टी डायरेक्टर जयबीर ढांडा ,कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र के पूर्व वाईस चांसलर डॉक्टर चावला ,  महाबीर गुड्डू , पुलिस भर्ती बोर्ड के सदस्य ओपी लोहान, हरियाणवीं फिल्मों के डायरेक्टर सतपाल मराठा, एडीसी अशोक कुमार गर्ग, एसडीएम गरीमा मितल, खंड शिक्षा अधिकारी सहदेव यादव , मेडम चन्द्रकलां व रामकुमार लोहान के हाथों सम्मानित हो चुके हैं।

सोमवार, 17 अगस्त 2015

तीज के त्यौहार को बचाए रखने के लिए महिलाओ ने की ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की अपील    

आज भी बरकरार है नारियों की पींग, सासू की नाक,
ग्रामीण आँचल में आज भी नाच गाकर धूमधाम से मनाई जाती है तीज,
    मीठी तो करदे री-माँ कोथली, जाणा से बाहण के देश, पपीहा बोल्या बाग म्है। …. 2 
सावन के महिने में एक और बहन के घर जाने के लिए उतावले भाई की भावना तो दूसरी ओर पेड पर लगे झूले पर झूलती नव यौवना और नव विवाहिता के मुंह से निकलते शब्द 
एक और तै लगंर पकडमां, 
मारी पींग बढ़ा कै,
सासू जी का नाक तोड लाई 
लांबा हाथ बढा कै, 
     जैसे किस्से कहानियां आज भी हरियाणवी संस्कृति को चार चांद लगा रही है।
      हरियाणा के त्योहारो में अहम भूमिका निभाने वाला तीज का त्योहार आज भी बडी खुशी से झूल कर मनाया जाता है। सावन माह शुरू होने के साथ ही युवा हाथों में मोटे रस्से लिए पेडों पर चढ जाते है और बडे प्यार से अपनी बहनों, भाभीयों व परिवार वालों के लिए झूले बनाते है। इसी के साथ नव यौवनाएं व नव विवाहिताए सखियों के साथ झूले झूलते हुए इन गीतों को गुनगुनाती है। युवतीयों को रस्से के सहारे पींग पर ज्यादा से जयादा उपर चढाया जाता है और जब पींग टहनियों के पास पहुंच जाती है तो गीत गाती हुई युवतियॉ टहनियों से पत्ते तोडकर लाती है जिसे सासू का नाक कहा जाता  है। खुशी से हसॅती, झूमती और झूलती इन युवतियों का यह दृश्य किसी को भी हरियाणवी संस्कृति से रूबर करवाने के लिए काफी होते है। पुरे प्रदेश में कि महिलाओ ने बड़ी धूमधाम से तीज मनाई। महिलाए सुबह घर का काम करने के बाद इकठे होकर नाचती गाती झूलने के लिए चल पड़ी और कई कई घंटो तक झूलती रही। झूलते समय जब पिंग को उपर चडाया जाता है तो महिलाए पेड़ों से पत्ते तोडकर लाती है और उसे सासु का नाक तोडना कहती है।   
    महिलाओं ने बताया कि गावों में उनके पूर्वज तीज का त्यौहार पिछले सेकड़ो वर्षों से मनाते आ रहे है और आज भी उसी पुरानी परम्परा के अनुसार तीज का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन बीते वक्त के साथ पेडो की संख्या घट गई है जिससे झूले डालने के लिए जगह / स्थान कम पड गया है। अगर इस तीज के त्योहार को हरियाली के रूप में हरियाणवी संस्कृति का अहम हिस्सा रखना है तो पैडों का बचाव करना भी जरूरी है। आज पेडो की कमी के कारण शहरों में पींग डालने के लिए जगह नहीं है लेकिन गांवो में यह परम्परा आज भी बरकरार है।

शनिवार, 15 अगस्त 2015

देश के राष्ट्रपति का एक दिन का खर्चा पांच लाख व सांसद का एक दिन का खर्चा पांच हजार रुपए,लेकिन बच्चों पर खर्च मात्र 1 रूपया

(हरियाणा हिसार) - हर वर्ष 15 अगस्त एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मात्रभूमि के प्रति स्नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्वपूर्ण स्मर्तियाँ है जो इस दिन के साथ जुडी है। यही वह दिन है जब अनेक शहीदों ने अपनी कुर्बानी देकर देश को आजादी दिलाई थी।इस दिन किस तरह से हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों शोषण व अपमान किया जाता है। 
             अगस्त का महीना शुरू होते ही पुरे हरियाणा के सरकारी स्कूलों के बच्चों में भारत माता के नाम के जयकारे कूट कूट कर भरे जाते है।वहीं बच्चे भी जोर जोर से कई दिनों तक मेरा देश महान , भारत माता की जय , जय जवान - जय किसान व वन्दे मातरम कहते कहते नहीं थकते। हर कोई बच्चों के हौसले को सलाम करता है। 
लेकिन बच्चों को इसके बदले मिलता क्या है ? 
 सिर्फ अपमान
       क्या हुआ चोंक गए।प्रदेश में पिछले अनेक सालों से शिक्षा विभाग व सरकार के आदेश पर प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों में हर वर्ष 15 अगस्त व 26 जनवरी बड़ी धूमधाम से मनाने के आदेश दिए जाते है और स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चो को कार्यक्रम के अंत में प्रसाद देना भी अनिवार्य किया हुआ है। उसी आदेश की पालना करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल बच्चो की कई दिन पहले से ही तैयारी करवानी शुरू कर देते है और 15 अगस्त व 26 जनवरी के पुरे दिन बच्चे अपने कार्यक्रमो की अनेक प्रस्तुति देते है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि इन बच्चो के खाने पीने व ईनाम के लिए मात्र एक रुपया प्रति बच्चा या मात्र 500 रुपए प्रत्येक सरकारी स्कूल को दिए जाते है। प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में चाहे 50 - 100 -500 - 1000 या चाहे 2000 से भी ज्यादा बच्चे हो तो उस स्कूल को भी मात्र 500 रुपए विभाग की तरफ से खर्च करने के लिए दिए जाते है। एक तरफ सरकार अनेक कार्यक्रमों पर लाखों - करोड़ों खर्च करती है वहीं बच्चो के लिए मात्र एक रुपया प्रति बच्चा या 500 रुपए देकर बच्चो का शोषण किया जाता है। महंगाई के इस दौर में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हो की एक रूपये में ये सब केसे सम्भव होगा।  
   क्या कहते है बच्चे - सरकारी स्कूलों के बच्चों का कहना है कि उनसे कई कई दिनों तक 15 अगस्त का कार्यक्रम मनाने के लिए तेयारिया करवाई जाती है जिसे वो बड़ी ही मेहनत व लगन के साथ करते है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें इसके बदले सिर्फ अपमान मिलता है उनका सिर्फ शोषण किया जाता है। बच्चों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान तैयारी पर जो भी खर्च होता है वो खर्च भी उन्हें अपने पास से करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इसके लिए उन्हें सहयोग राशि बढ़ाकर उनका सम्मान करे और शोषण से बचाए । 
    क्या कहते है स्कूल मुखिया -   सरकारी स्कूल के मुखियाओ से जब इस बारे में बात कि तो उन्होंने बताया कि पिछले अनेक सालो से 15 अगस्त व 26 जनवरी के दिन बच्चो पर खर्च करने के लिए मात्र 500 रुपए प्रति स्कूल मिलते आ रहे है। जो की आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुहं में जीरे के समान है। स्कूल के मुखियाओ ने भी इस राशी को बढ़ाने की मांग की है।  
    क्या कहते है समाजसेवी -  समाजसेवियों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की देश के राष्ट्रपति का एक दिन का खर्चा पांच लाख व सांसद का एक दिन का खर्चा पांच हजार रुपए है जबकि जिन्हे हम देश  का भविष्य कहते है और स्वतन्त्रता दिवस की तैयारी में एक महीने तक भारत माता के नारे लगाते है और 15 अगस्त को धुप में कार्यक्रम प्रस्तुत करते है उन्हें मात्र एक रुपया खर्च का दिया जाता है जो की आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुहं में जीरे के समान है। समाजसेवियों ने भी इस राशी को बढ़ाने की मांग की है।