(हरियाणा हिसार) - हर वर्ष 15 अगस्त एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मात्रभूमि के प्रति स्नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्वपूर्ण स्मर्तियाँ है जो इस दिन के साथ जुडी है। यही वह दिन है जब अनेक शहीदों ने अपनी कुर्बानी देकर देश को आजादी दिलाई थी।इस दिन किस तरह से हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों शोषण व अपमान किया जाता है।
अगस्त का महीना शुरू होते ही पुरे हरियाणा के सरकारी स्कूलों के बच्चों में भारत माता के नाम के जयकारे कूट कूट कर भरे जाते है।वहीं बच्चे भी जोर जोर से कई दिनों तक मेरा देश महान , भारत माता की जय , जय जवान - जय किसान व वन्दे मातरम कहते कहते नहीं थकते। हर कोई बच्चों के हौसले को सलाम करता है।
लेकिन बच्चों को इसके बदले मिलता क्या है ?
सिर्फ अपमान
क्या हुआ चोंक गए।प्रदेश में पिछले अनेक सालों से शिक्षा विभाग व सरकार के आदेश पर प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों में हर वर्ष 15 अगस्त व 26 जनवरी बड़ी धूमधाम से मनाने के आदेश दिए जाते है और स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चो को कार्यक्रम के अंत में प्रसाद देना भी अनिवार्य किया हुआ है। उसी आदेश की पालना करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल बच्चो की कई दिन पहले से ही तैयारी करवानी शुरू कर देते है और 15 अगस्त व 26 जनवरी के पुरे दिन बच्चे अपने कार्यक्रमो की अनेक प्रस्तुति देते है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि इन बच्चो के खाने पीने व ईनाम के लिए मात्र एक रुपया प्रति बच्चा या मात्र 500 रुपए प्रत्येक सरकारी स्कूल को दिए जाते है। प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में चाहे 50 - 100 -500 - 1000 या चाहे 2000 से भी ज्यादा बच्चे हो तो उस स्कूल को भी मात्र 500 रुपए विभाग की तरफ से खर्च करने के लिए दिए जाते है। एक तरफ सरकार अनेक कार्यक्रमों पर लाखों - करोड़ों खर्च करती है वहीं बच्चो के लिए मात्र एक रुपया प्रति बच्चा या 500 रुपए देकर बच्चो का शोषण किया जाता है। महंगाई के इस दौर में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हो की एक रूपये में ये सब केसे सम्भव होगा।
क्या कहते है बच्चे - सरकारी स्कूलों के बच्चों का कहना है कि उनसे कई कई दिनों तक 15 अगस्त का कार्यक्रम मनाने के लिए तेयारिया करवाई जाती है जिसे वो बड़ी ही मेहनत व लगन के साथ करते है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें इसके बदले सिर्फ अपमान मिलता है उनका सिर्फ शोषण किया जाता है। बच्चों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान तैयारी पर जो भी खर्च होता है वो खर्च भी उन्हें अपने पास से करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इसके लिए उन्हें सहयोग राशि बढ़ाकर उनका सम्मान करे और शोषण से बचाए ।
क्या कहते है स्कूल मुखिया - सरकारी स्कूल के मुखियाओ से जब इस बारे में बात कि तो उन्होंने बताया कि पिछले अनेक सालो से 15 अगस्त व 26 जनवरी के दिन बच्चो पर खर्च करने के लिए मात्र 500 रुपए प्रति स्कूल मिलते आ रहे है। जो की आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुहं में जीरे के समान है। स्कूल के मुखियाओ ने भी इस राशी को बढ़ाने की मांग की है।
क्या कहते है समाजसेवी - समाजसेवियों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की देश के राष्ट्रपति का एक दिन का खर्चा पांच लाख व सांसद का एक दिन का खर्चा पांच हजार रुपए है जबकि जिन्हे हम देश का भविष्य कहते है और स्वतन्त्रता दिवस की तैयारी में एक महीने तक भारत माता के नारे लगाते है और 15 अगस्त को धुप में कार्यक्रम प्रस्तुत करते है उन्हें मात्र एक रुपया खर्च का दिया जाता है जो की आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुहं में जीरे के समान है। समाजसेवियों ने भी इस राशी को बढ़ाने की मांग की है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें