रविवार, 4 अक्टूबर 2015

भीम सिहं मेरे साथी ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌.......


                                      एक थे भीम सिंह बडाला.......



                  

आज का ब्लॉग लिखते समय अपने आप को काफी दुःखी महसूस कर रहा हूँ क्योंकि कल हमारे साथी भीम सिंह बडाला हमें छोड़ कर चले गए।भीम सिंह एक निडर,निष्पक्ष व जिंदादिल पत्रकार थे। भीम सिंह करीब 15 वर्षो से नारनौंद व हाँसी में पत्रकारिता कर रहे थे।पिछले 5 वर्षो से ए वन तहलका,खबरें अभी तक,ईटीवी और टोटल टीवी से जुड़े हुए थे।  इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया में अपनी छाप छोड़ने वाले भीम सिंह का शनिवार को उनके गाँव बडाला में निधन हो गया। मुझे ये जानकर बड़ी हैरानी हुई कि भीम सिंह का निधन कैंसर की बीमारी के कारण हुआ है।जिस इंसान ने कभी भी कोई नशे की चीज का प्रयोग नहीं किया हो उसको कैंसर हो जाएं।मुझे आज भी याद है, जब मै भीम सिंह के साथ घर आते समय उनकी गाड़ी में बैठ कर आया था.… तो खरकड़ा गाँव के एक आदमी ने गाड़ी में बीड़ी जला ली थी तो भीम सिंह ने उनको गाड़ी से ही उतार दिया था।दूसरी घटना जब मुझे किसी ने बताया कि आज भीम सिंह के साथ बस में बाँस गाँव के लड़के ने झगड़ा किया है तभी मैने उनके पास कॉल कि तो पता लगा कि वो झगड़ा भी सिगरेट को लेकर ही हुआ था।कल से यही सोच कर हैरान हूँ कि जिस इंसान को नशे से इतनी नफरत हो उसको कैंसर कैसे हो सकता है ?

           जब मै हाँसी में टीवी 24 के लिए काम करता था, तब मुझे भीम सिंह के साथ 2 महीने काम करने का मौका मिला था।उसके बाद मै नारनौंद चला गया था।उनका काम करने का तरीका भी काफी अलग ही था वो एक साथ कई - कई स्टोरी कवर करते थे।हाँसी में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वो इकलौते ऐसे पत्रकार थे जो काफी पुराने व कई न्यूज़ चैनलों से जुड़े हुए थे।उन्होंने हमेशा ही सच का साथ दिया इस कारण उनके विरोधी भी ज्यादा थे।वो ग्रुप की बजाय अकेले ही काम करने में विश्वास रखते थे। भीम सिंह के ऐसे छोड़ कर चले जाने से पत्रकारिता जगत को कितनी हानि हुई है इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

          अब तो बस इस बात का दुःख है कि अगर मुझे ये पता चल जाता की भीम सिंह बीमार है तो मै उनसे मिलने जरूर जाता।क्योंकि मै पिछले 3 महीने से दिल्ली हूँ इस कारण मुझे पता नही चला।अब भगवान से यही प्रार्थना है कि भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को इस दुःख की घड़ी में सहनशक्ति दे।

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