शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड से भी सम्मानित है अजय लोहान  लेफ्टिनेंट , डॉक्टर व इंजीनियर बन कर रहे है देश सेवा   

अध्यापक दिवश पर स्पेशल स्टोरी    
सलाम ऐसे जज्बे को  ..................     
मिशाल: शिक्षा के क्षेत्र में बनाया अलग मकाम
एक अध्यापक जिसने बदल दिए सरकारी स्कूल के मायने
जो बच्चे पहले हिंदी भी ठीक से नहीं बोल पाते थे, आज वे बोलते है फर्राटेदार अंग्रेज़ी ।अपनी तनख्वाह बच्चों की प्रतिभा पर खर्च करता है यह टीचर 
हर साल दस लड़कियों को पढ़ाता है अपने खर्चे से 
निरक्षर लोगों को भी दे चुके है अक्षर ज्ञान। हरियाणवी संस्कृति को बचाने के लिए भी जंग लड़ रहा है नारनौंद का अजय लोहान। 
    हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड, बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड से भी सम्मानित है अजय लोहान 
लेफ्टिनेंट , डॉक्टर व इंजीनियर बन कर रहे है देश सेवा   
(हिसार हरियाणा) सात वर्ष पहले हिसार जिले के कस्बे नारनौंद के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में अजय लोहान का चयन गेस्ट टीचर के रूप में हुआ था। पहले दिन जब वे स्कूल पहुँचे, तो कुछ बच्चों ने उन्हें हरियाणवी में नमस्कार किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ में आया कि कुछ बच्चों को छोड़ तमाम बच्चे स्कूल में हरियाणावी को ही मुख्य भाषा के रूप में उपयोग कर रहे थे। अजय अंग्रेज़ी के अध्यापक थे और जब उन्होंने बच्चों को अंग्रेज़ी पढ़ाना शुरू किया, तो एक भी बच्चा ठीक से न तो समझ पाया और न ही उनके द्वारा पढ़ायी गयी चीज़ों को दोहरा पाया। यह सब देखकर अजय हैरान रह गये। रह-रह कर उनके मन में यही बात घूमती रही कि अंग्रेज़ी के मामले में शहरों के बच्चों के मुकाबले ग्रामीण बच्चे कितने पीछे हैं। शहरी बच्चे जहाँ अच्छे से इंग्लिश बोल लेते हैं, वहीं उनके स्कूल के बच्चे ठीक से हिंदी भी नहीं बोल पा रहे थे। बस फिर क्या था, अजय ने इस बारे में कुछ करने की ठान ली। अजय ने अपने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर बच्चों पर खूब मेहनत करनी शुरू की। धीरे-धीरे अजय की मेहनत रंग लाने लगी। जिस स्कूल के बच्चे अंग्रेज़ी समझ भी नहीं पाते थे , अब वे अंग्रेज़ी में बात करते हैं। बच्चों और शिक्षकों की मेहनत से स्कूल के परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है। नारनौंद के रहने वाले 30 वर्षीय अजय लोहान ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने का काम किया है। ग्रामीण आंचल से होते हुए भी अजय लोहान ने इंग्लिश विषय को लेकर बच्चों पर ऐसी मेहनत करी कि आज उनकी प्रतिभा के क्षेत्र में खूब चर्चे हैं। अजय के जिस स्कूल में जहाँ पहले 400 बच्चे पढ़ते थे, वहीं अब यह आंकड़ा  1622 तक पहुँच गया है।
बच्चों पर खर्च करते हैं अपनी तनख्वाह -
बच्चों के सर्वांगीण विकास में जुटे अजय लोहान पिछले 8 सालों से स्कूल से मिलने वाली अपनी तनख्वाह को बच्चों पर ही खर्च कर देते हैं। अजय से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "मैं बस स्कूल का पैसा स्कूल पर व बच्चों पर ही लगा देता हूँ। जो बच्चे पैसे की कमी की वजह से स्कूल की किताबें या स्टेशनरी नहीं ले पाते उनके लिये ज़रूरी चीज़ें खरीद लेता हूँ।"  इसके अलावा अजय लोहान अपनी तनख्वाह को बच्चों की प्रतियोगिता करवाने में भी खर्च करते हैं। इस बारे में अजय बताते हैं कि 2001 में वे जींद के कॉलेज से बीए कर रहे थे, कॉलेज की तरफ से उनका नाम एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए भेजा गया। वहाँ 50 में से 47 नंबर मिलने के कारण वो पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गए। वापस आने के बाद कॉलेज के अध्यापकों ने अजय को बताया कि अगर शुरू से ही तैयारी की होती, तो ऐसा न होता। बस उसी दिन से अजय ने ठान लिया कि जैसा उनके साथ हुआ है, वैसा उनके क्षेत्र के किसी भी ग्रामीण बच्चें के साथ नहीं होगा। 2001 से ही अजय भाषण, कविता लेखन, खेल, जनरल नॉलेज, डांस सहित सैकड़ों प्रतियोगिताओं का आयोजन करवा रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही अजय द्वारा प्रशिक्षित टीम ने जिलास्तर पर आयोजित युवा संसद में पहला स्थान प्राप्त किया।
        कई पुरस्कारों से सम्मानित हुए अजय  - नारनौंद निवासी अतिथि अध्यापक अजय लोहान ने ऐसी मिशाल कायम की है जिसकी रोशनी से विद्यार्थियों की राह सदैव रोशन होती रहेगी। छोटे से कस्बे में शिक्षा रुपी रोशनी की मशाल लेकर निकले अध्यापक अजय लोहान ने सबसे कम उम्र में वो कर दिखाया है जो दूसरों के लिए महज कल्पना हो सकती है।अजय लोहान को उनके प्रयासों के लिए हरियाणा गौरव अवार्ड, बेस्ट स्टेट मोटिवेशन अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, प्राणनाथ प्रणामी अवार्ड , हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड , बेस्ट पार्लियामेंट आर्गेनाईजेशन अवार्ड व कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए गोल्ड़ मेडल मिल चुका है।
        ये है विशेष उपलब्धियां - अजय द्वारा पढ़ाए गए बच्चों के करियर की अगर बात करें तो उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चों ने  पिछले 7 सालों से सरकारी स्कूलों में लगातार जिले में पहला , दूसरा व तीसरा स्थान हासिल कर कभी न टूटने वाला इतिहास कायम किया है। इसके साथ साथ हर साल इनका परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है। और इनके दर्जनों बच्चे इंग्लिश विषय में सत प्रतिशत अंक हासिल कर चुके है। इनके 5 छात्र वर्ष 2013 में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुए। इतना ही नहीं 3 बच्चे डॉक्टर, एक बच्चे का आई आई टी मुंबई में चयन , 34 बच्चे इंजीनियर बने और 122 बच्चों का चयन दिल्ली व पंजाब यूनिवर्सिटी में हुआ है। उनके द्वारा पढ़ाये गये 200 से भी ज़्यादा विद्यार्थियों को विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से छात्रवृति मिल चुकी है और 29 बच्चों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिल रही है। इनके द्वारा तैयार की गई युथ पार्लियामेंट की टीम ने 2 बार जिले में पाया प्रथम स्थान , विद्यालय सौन्द्रीयकरण में विद्यालय को दिलवाया गोल्ड मेडल और समय समय पर बच्चों को करवाते है शैक्षिक भ्रमण आदि।  इसके साथ साथ लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर साल 10 गरीब लड़कियों का अपने पैसों से पढ़ाते है।
        प्रसिद्ध कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस ने भी माना अजय लोहान के प्रयाशों का लोहा -  अजय लोहान के प्रयासों का लोहा प्रसिद्ध कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस ने भी माना है। अजय बच्चों को कंपनी के हेड ऑफिस लेकर गए थे, उस दौरान बच्चों की प्रतिभा से प्रभावित होकर और अजय के अनुरोध पर कंपनी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए 10 कंप्यूटर भी देने का फैसला लिया जिससे आज बच्चे तकनिकी शिक्षा का लाभ ले रहे है। इतना ही नहीं कंपनी ने उनके द्वारा किए गए अनुरोध पर 10 कंप्यूटर और देने की बात को स्वीकार कर लिया है।   
         पिता के पदचिह्नों पर चल रहे अजय - अजय लोहान  ने नारनौंद के जिस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में अपनी सेवाएँ दी हैं उनके पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक रह चुके हैं। अजय के पिता स्वर्गीय रामनिवास लोहान इसी स्कूल में राजनीती शास्त्र के प्राध्यापक रह चुके हैं। अजय कहते हैं कि पिता से मिली प्रेरणाओं के चलते ही वे शिक्षक बने।
       कुर्शी से है सख्त नफरत - अजय लोहान पिछले 8 सालों से कभी भी कुर्शी पर नहीं बैठे है। क्लास में हमेशा खड़े रहकर पढ़ाने वाले अजय ने अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि वे शिक्षा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपना व अपने गाँव का नाम रोशन करना चाहते हैं। ग्रामीण आंचल के बच्चों को अच्छे पदों पर पहुँचाना भी उनका लक्ष्य है।
      हर साल 10 लड़कियों को पढ़ाते है अपने खर्चे पर - जिस मुहीम को हरियाणा सरकार ने आम शुरू किया है उस मुहीम को अजय लोहान पिछले कई सालों से चला कर बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रहे है।  गरीब लड़कियां शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए वो अपने खर्चे से 10 लड़कियों को पढ़ाकर अतुल्य कार्य कर रहे है जिससे बच्चे उन्हें अपना संरक्षण मानने लगे।
        हरियाणवी संस्कृति के संरक्षक भी है अजय लोहान - ऐसा नहीं है कि इस अध्यापक को केवल अंग्रेजी से ही लगाव है बल्कि नारनौंद निवासी अध्यापक अजय लोहान पिछले 14 सालों से हरियाणवीं संस्कृति के प्रसार व प्रचार में जुटे हैं। अकेला चलों की तर्ज पर अपने मिशन पर निकले अजय लोहान के साथ सैकड़ों संस्कृति प्रेमियों का कारवां है। 30 वर्षीय अजय लोहान अतिथि अध्यापक शिक्षा के प्रचार व प्रसार के साथ साथ वे अपने व्यस्थ समय में से समय निकालकर लोगों को पश्चिमी सभ्यता से बचाने के लिए हरियाणवीं संस्कृति के प्रति जागरूक कर रहें है। अजय लोहान अपने छात्र जीवन में मिलने वाले जेब खर्च की रकम को भी हरिणाणवीं संस्कृति को बचाने में जुटे हुए हैं। वे वर्ष 2001से हरियाणवीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हरियाणवीं संस्कृति का प्रसार कर रहें है। वे हरियाणवीं संस्कृति के प्रसार में लगे दूसरे हरियाणवीं कलाकारों को समय-समय पर सम्मानित भी करते रहते हैं। अजय लोहान विगत कई वर्षों से नाटक मंडली के माध्यम से भी ग्रामीणों को जागरुक कर रहें है। हरियाणवीं संस्कृति के परहेरी अजय लोहान क्षेत्र के लोगों में चर्चा का विषय तो बने ही हुए हैं। अजय लोहान को उनके इस सराहनीय कार्य के लिए हरियाणा संस्कृति संरक्षक अवार्ड से भी नवाजा जा चूका है।
      इनसे हो चुके है सम्मानित - योगगुरु स्वामी रामदेव, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व मुख्यमंत्री  हुड्डा ,  शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ,राज्यसभा सांसद कुमारी सेलजा , पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्क्ल , पूर्व राजयपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा , डिप्टी डायरेक्टर जयबीर ढांडा ,कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र के पूर्व वाईस चांसलर डॉक्टर चावला ,  महाबीर गुड्डू , पुलिस भर्ती बोर्ड के सदस्य ओपी लोहान, हरियाणवीं फिल्मों के डायरेक्टर सतपाल मराठा, एडीसी अशोक कुमार गर्ग, एसडीएम गरीमा मितल, खंड शिक्षा अधिकारी सहदेव यादव , मेडम चन्द्रकलां व रामकुमार लोहान के हाथों सम्मानित हो चुके हैं।

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