सोमवार, 17 अगस्त 2015

तीज के त्यौहार को बचाए रखने के लिए महिलाओ ने की ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की अपील    

आज भी बरकरार है नारियों की पींग, सासू की नाक,
ग्रामीण आँचल में आज भी नाच गाकर धूमधाम से मनाई जाती है तीज,
    मीठी तो करदे री-माँ कोथली, जाणा से बाहण के देश, पपीहा बोल्या बाग म्है। …. 2 
सावन के महिने में एक और बहन के घर जाने के लिए उतावले भाई की भावना तो दूसरी ओर पेड पर लगे झूले पर झूलती नव यौवना और नव विवाहिता के मुंह से निकलते शब्द 
एक और तै लगंर पकडमां, 
मारी पींग बढ़ा कै,
सासू जी का नाक तोड लाई 
लांबा हाथ बढा कै, 
     जैसे किस्से कहानियां आज भी हरियाणवी संस्कृति को चार चांद लगा रही है।
      हरियाणा के त्योहारो में अहम भूमिका निभाने वाला तीज का त्योहार आज भी बडी खुशी से झूल कर मनाया जाता है। सावन माह शुरू होने के साथ ही युवा हाथों में मोटे रस्से लिए पेडों पर चढ जाते है और बडे प्यार से अपनी बहनों, भाभीयों व परिवार वालों के लिए झूले बनाते है। इसी के साथ नव यौवनाएं व नव विवाहिताए सखियों के साथ झूले झूलते हुए इन गीतों को गुनगुनाती है। युवतीयों को रस्से के सहारे पींग पर ज्यादा से जयादा उपर चढाया जाता है और जब पींग टहनियों के पास पहुंच जाती है तो गीत गाती हुई युवतियॉ टहनियों से पत्ते तोडकर लाती है जिसे सासू का नाक कहा जाता  है। खुशी से हसॅती, झूमती और झूलती इन युवतियों का यह दृश्य किसी को भी हरियाणवी संस्कृति से रूबर करवाने के लिए काफी होते है। पुरे प्रदेश में कि महिलाओ ने बड़ी धूमधाम से तीज मनाई। महिलाए सुबह घर का काम करने के बाद इकठे होकर नाचती गाती झूलने के लिए चल पड़ी और कई कई घंटो तक झूलती रही। झूलते समय जब पिंग को उपर चडाया जाता है तो महिलाए पेड़ों से पत्ते तोडकर लाती है और उसे सासु का नाक तोडना कहती है।   
    महिलाओं ने बताया कि गावों में उनके पूर्वज तीज का त्यौहार पिछले सेकड़ो वर्षों से मनाते आ रहे है और आज भी उसी पुरानी परम्परा के अनुसार तीज का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन बीते वक्त के साथ पेडो की संख्या घट गई है जिससे झूले डालने के लिए जगह / स्थान कम पड गया है। अगर इस तीज के त्योहार को हरियाली के रूप में हरियाणवी संस्कृति का अहम हिस्सा रखना है तो पैडों का बचाव करना भी जरूरी है। आज पेडो की कमी के कारण शहरों में पींग डालने के लिए जगह नहीं है लेकिन गांवो में यह परम्परा आज भी बरकरार है।

शनिवार, 15 अगस्त 2015

देश के राष्ट्रपति का एक दिन का खर्चा पांच लाख व सांसद का एक दिन का खर्चा पांच हजार रुपए,लेकिन बच्चों पर खर्च मात्र 1 रूपया

(हरियाणा हिसार) - हर वर्ष 15 अगस्त एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मात्रभूमि के प्रति स्नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्वपूर्ण स्मर्तियाँ है जो इस दिन के साथ जुडी है। यही वह दिन है जब अनेक शहीदों ने अपनी कुर्बानी देकर देश को आजादी दिलाई थी।इस दिन किस तरह से हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों शोषण व अपमान किया जाता है। 
             अगस्त का महीना शुरू होते ही पुरे हरियाणा के सरकारी स्कूलों के बच्चों में भारत माता के नाम के जयकारे कूट कूट कर भरे जाते है।वहीं बच्चे भी जोर जोर से कई दिनों तक मेरा देश महान , भारत माता की जय , जय जवान - जय किसान व वन्दे मातरम कहते कहते नहीं थकते। हर कोई बच्चों के हौसले को सलाम करता है। 
लेकिन बच्चों को इसके बदले मिलता क्या है ? 
 सिर्फ अपमान
       क्या हुआ चोंक गए।प्रदेश में पिछले अनेक सालों से शिक्षा विभाग व सरकार के आदेश पर प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों में हर वर्ष 15 अगस्त व 26 जनवरी बड़ी धूमधाम से मनाने के आदेश दिए जाते है और स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चो को कार्यक्रम के अंत में प्रसाद देना भी अनिवार्य किया हुआ है। उसी आदेश की पालना करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी स्कूल बच्चो की कई दिन पहले से ही तैयारी करवानी शुरू कर देते है और 15 अगस्त व 26 जनवरी के पुरे दिन बच्चे अपने कार्यक्रमो की अनेक प्रस्तुति देते है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि इन बच्चो के खाने पीने व ईनाम के लिए मात्र एक रुपया प्रति बच्चा या मात्र 500 रुपए प्रत्येक सरकारी स्कूल को दिए जाते है। प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में चाहे 50 - 100 -500 - 1000 या चाहे 2000 से भी ज्यादा बच्चे हो तो उस स्कूल को भी मात्र 500 रुपए विभाग की तरफ से खर्च करने के लिए दिए जाते है। एक तरफ सरकार अनेक कार्यक्रमों पर लाखों - करोड़ों खर्च करती है वहीं बच्चो के लिए मात्र एक रुपया प्रति बच्चा या 500 रुपए देकर बच्चो का शोषण किया जाता है। महंगाई के इस दौर में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हो की एक रूपये में ये सब केसे सम्भव होगा।  
   क्या कहते है बच्चे - सरकारी स्कूलों के बच्चों का कहना है कि उनसे कई कई दिनों तक 15 अगस्त का कार्यक्रम मनाने के लिए तेयारिया करवाई जाती है जिसे वो बड़ी ही मेहनत व लगन के साथ करते है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि उन्हें इसके बदले सिर्फ अपमान मिलता है उनका सिर्फ शोषण किया जाता है। बच्चों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान तैयारी पर जो भी खर्च होता है वो खर्च भी उन्हें अपने पास से करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इसके लिए उन्हें सहयोग राशि बढ़ाकर उनका सम्मान करे और शोषण से बचाए । 
    क्या कहते है स्कूल मुखिया -   सरकारी स्कूल के मुखियाओ से जब इस बारे में बात कि तो उन्होंने बताया कि पिछले अनेक सालो से 15 अगस्त व 26 जनवरी के दिन बच्चो पर खर्च करने के लिए मात्र 500 रुपए प्रति स्कूल मिलते आ रहे है। जो की आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुहं में जीरे के समान है। स्कूल के मुखियाओ ने भी इस राशी को बढ़ाने की मांग की है।  
    क्या कहते है समाजसेवी -  समाजसेवियों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की देश के राष्ट्रपति का एक दिन का खर्चा पांच लाख व सांसद का एक दिन का खर्चा पांच हजार रुपए है जबकि जिन्हे हम देश  का भविष्य कहते है और स्वतन्त्रता दिवस की तैयारी में एक महीने तक भारत माता के नारे लगाते है और 15 अगस्त को धुप में कार्यक्रम प्रस्तुत करते है उन्हें मात्र एक रुपया खर्च का दिया जाता है जो की आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुहं में जीरे के समान है। समाजसेवियों ने भी इस राशी को बढ़ाने की मांग की है।
                 

    

उस भोग का क्या फ़ायदा जब पडोसी ही भूखा हो ?

(सोनू शर्मा )मेरे हिसाब से आज़ादी का असली मतलब तो वो होता है जब हर हाथ को काम,भूखे को रोटी और हर सिर को छत मिले।
ये कैसी आज़ादी जब किसी की आवाज़ को ही कुचल दिया जाता है।जहाँ कुत्ते को बिस्किट और इंशान को रोटी ना मिले।इस देश में आज अमीर आदमी अमीर होता जा रहा है और ग़रीब बेचारा गरीब होता जा रहा है।मुझे उमीद है अगली बार 15 अगस्त तक काफी सुधार होगा सच में लोगो को आज़ादी मिलेगी।उस भोग का क्या फ़ायदा जब पडोसी ही भूखा हो ?

आप सभी देशवासियों स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

रविवार, 9 अगस्त 2015

भारतीय सेना एक बार फिर लोकप्रियता की सूची के शिखर पर है।

नई दिल्ली

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर CIA, FBI, NASA और यहां तक कि पाकिस्तानी सेना सहित कई विदेशी सरकारी प्रतिष्ठानों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय सेना एक बार फिर लोकप्रियता की सूची के शिखर पर है।यह दूसरी बार है जब फेसबुक पर 'पीपल टॉकिंग अबाउट दैट' (PTAT) रैंकिंग में भारतीय सेना का फेसबुक पेज शीर्ष पर है।

सेना के सूत्रों ने बताया 'सेना के सोशल मीडिया के लिए यह बड़ी बात है। दो माह पूर्व ही हमने पहली बार शीर्ष स्थान हासिल किया था। इससे यह भी साबित होता है कि हमारे पेज को वास्तव में पसंद किया जाता है।' PTAT की रैंकिंग किसी खास पेज पर या उसके बारे में बात करने वालों की संख्या के विश्लेषण पर आधारित होती है। भारतीय सेना की यह उपलब्धि केवल फेसबुक पेज पर ही नहीं है बल्कि सेना की आधिकारिक वेबसाइट को भी हर सप्ताह कम से कम 25 लाख हिट मिलते हैं।

सेना ने फेसबुक पर अपना खाता एक जून 2013 को खोला था और तब से उसे 29 लाख 'लाइक्स' मिल चुके हैं। दिलचस्प बात है कि फेसबुक पर भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई जारी है और दोनों ने जिओ लोकेशन के माध्यम से एक दूसरे का अकाउंट ब्लॉक कर दिया है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान का कोई व्यक्ति भारतीय सेना के फेसबुक पेज को नहीं खोल सकता और न ही भारत का कोई व्यक्ति पाकिस्तानी सेना के फेसबुक पेज पर पहुंच सकता है।

भारतीय सेना के ट्विटर अकाउंट के चार लाख 47 हजार फॉलोअर हैं। उन्होंने कहा 'सोशल मीडिया सेना के, पहुंच बढ़ाने के कार्यक्रम का महत्वपूर्ण तत्व है।'