मंगलवार, 14 जून 2016

छा गया म्हारे हरियाणे का छोरा

(सोनू शर्मा) तीसरे टी-20 मैच में इंग्लैंड को 75 रनों से शिकस्त देने के बाद भारत के इस खिलाड़ी की जमकर तारीफ हो रही है. इस खिलाड़ी का नाम है युजवेंद्र चहल. चहल ने इस मैच में 6 विकेट लेकर इंग्लैंड टीम की कमर तोड़ दी. चहल ने मात्र 25 रन देकर इंग्लैंड के 6 खिलाड़ियो को पैविलियन का रास्ता दिखाया।इससे पहले भारत ने जिम्बाब्वे को दूसरे वनडे मैच में 8 विकेट से हरा दिया। टीम इंडिया के युवा गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को एक समय तीन विकेट पर 106 रन की शानदार स्थिति को 34.3 ओवर में 126 रन पर समेट दिया। जींद के लेग स्पिनर गेंदबाज युजवेंद्र चहल ने 25 रन पर तीन और सिरसा के बरिंदर सरां ने 2 विकेट लिए।

युजवेंद्र अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅरिअर के दूसरे ही मैच में मैन ऑफ मैचचुने गए। भारत ने 26.5 ओवर में दो विकेट पर 129 रन बनाकर एकतरफा जीत हासिल कर ली। इसके साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की सीरीज 2-0 से जीत ली। दोनों टीमों के बीच तीसरा वनडे 15 जून को खेला जाएगा।
महेंद्र सिंह धोनी ने 20 महीने के लंबे अंतराल के बाद अपनी कप्तानी में वनडे सीरीज जीती है। उनकी कप्तानी में भारत ने आखिरी बार अक्टूबर 2014 में घरेलू जमीन पर वेस्टइंडीज से वनडे सीरीज जीती थी।



25 वर्षीय लेग स्पिनर ने कहा, "मेरी गेंदों पर जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों ने शुरू में प्रहार किए। मैं स्टंप-टू-स्टंप लाइन पर गेंदबाजी करने की कोशिश कर रहा था लेकिन माही भाई (धोनी) ने मुझे हवा में गेंद को धीमा रखने की सलाह दी थी और मैंने उनकी सलाह पर काम किया। यह रणनीति सफल रही। विकेट धीमा था और मैंने गेंदबाजी का भरपूर आनंद लिया।





आइये जानते है कौन है युजवेंद्र चहल

युजवेंद्र चहल हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले है उनके एडवोकेट पिता केके चहल का सपना था कि उनका इकलौता बेटा क्रिकेटर बने और इंडिया के लिए खेले। इसके लिए उन्होंने कम मेहनत नहीं की। खेत में पिच बनाकर बेटे को प्रैक्टिस कराया। स्टेडियम घर से दूर था और वहां पूरी सुविधाएं नहीं थीं। युजवेंद्र 6-7 साल की उम्र से क्रिकेट खेलने लगा था। पढ़ाई में मन लगता नहीं था।2004 में क्रिकेट के प्रति उसका लगाव देखकर मैंने अपने डेढ़ एकड़ खेत में उसके लिए पिच बनवाई। यहीं वह सुबह-शाम प्रैक्टिस करता था।2011 तक उसने खेत में ही प्रैक्टिस की। जब उसका अंडर-19 में सिलेक्शन हुआ तो मुझे पहली बार लगा कि एक दिन हमारा सपना जरूर सच होगा।



ऑलराउंडर प्लेयर हैं युजवेंद्र

युजवेंद्र लेग स्पिनर होने के साथ एक उम्दा ऑलराउंडर भी हैं। हिमाचल के खिलाफ रणजी में 152 रनों की यादगार पारी खेल चुके हैं।आईपीएल के इस सीजन में तो अब तक के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।बेटे की सफलता से खुश माता- पिता ने कहा, ‘आखिर युजवेंद्र की मेहनत रंग लाई। हमारा सपना बस पूरा होने को है।
बेंगलुरु के स्टार प्लेयर हैं चहल


19 विकेट लेकर आईपीएल के इस सीजन में अब तक नंबर वन गेंदबाज।11मैच खेले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए।2015 में भी आरसीबी के सबसे अधिक विकेट लेने वाले बॉलर रहे।उस सीजन में 15 मैचों में 23 विकेट लिए थे।ओवरऑल आईपीएल सीजन के तीसरे बेस्ट बॉलर बनें। टी-20फॉर्मेट में अब तक 80 विकेट ले चुके हैं 77 मैंचों में।

शनिवार, 28 मई 2016

बिना शादी के सियासत के शिखर तक पहुंचे ये नेता

देश की राजनीति में कई ऐसे कुंवारे नेता हैं, जिन्होंने राजनीति को बदल डाला है। इस श्रेणी में अब देश सबसे बड़े राज्य के युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी जुड़ चुका है। थोड़े दिन पहले ही असम के भावी सीएम सर्वानंद सोनोवाल भी सूची में शामिल हो गए थे। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बेनर्जी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर,ओड़िसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता तो पहले से ही लिस्ट शामिल हो चुकी थी हालाकिं करीब ढाई महीने  अस्पताल में भर्ती रहने के बाद मुख्यमंत्री जे.जयललिता का निधन 5 दिसंबर 2017 को हो गया।

आदित्यनाथ योगी


उत्तर प्रदेश में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है।साथ ही उन्‍होंने कार्यभार भी संभाल लिया है।योगी आदित्यनाथ को घर में अजय सिंह बिष्ट के नाम से जानते है और उनका जन्म 5 जून 1972  को उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूड़ गांव के गढ़वाली राजपूत परिवार में हुआ।उसके बाद गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर के महन्त और फिर राजनेता और उसके बाद देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने।योगी आदित्यनाथ 1998 से लगातार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और 2014 लोकसभा चुनाव में भी यहीं से सांसद चुने गए थे। सबसे पहले 1998 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और जीत गए। तब इनकी उम्र केवल 26 वर्ष थी। वे बारहवीं लोक सभा (1998-99) के सबसे युवा सांसद थे।2009 में ये 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर ये सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया। इन्हें एक हेलीकॉप्टर भी दिया गया।योगी हिन्दू युवाओं के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं।और इनकी छवि कथित तौर पर एक कट्टर हिन्दू नेता की रही है।फिलहाल योगी के कामों की तारीफ जा रही है और वे महज 8 दिन में 80 से ज्यादा कठोर फैसले ले चुके है।








सर्वानंद सोनोवाल 

31 अक्टूबर, 1962 को डिब्रूगढ़ जिले के दिंजन में पैदा हुए सर्वानंद सोनोवाल ने गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1992 में की थी। केंद्र सरकार में खेल मंत्रालय संभाल रहे सोनोवाल निजी तौर पर फुटबॉल और बैडमिंटन के खिलाड़ी भी रहे हैं।साल 1992 से राजनीति में सक्रिय सोनोवाल ने हमेशा राज्य में ही रहकर आंतरिक राजनीति की। 1992 से 1999 तक वह ऑल असम स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद सोनोवाल ने असम गण परिषद् ज्वाइन की और 2001 में विधायक चुने गये। 2004 में पहली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री पबन सिंह घाटोवर को हराकर वो लोकसभा में पहुंचे थे।

बेदाग छवि
सर्बानंद सोनोवाल कछारी समुदाय (अनुसूचित जनजाति) से आते हैं। वह बेदाग छवि के नेता हैं। असम में उनकी लोकप्रियता भी खूब है। पहले वह असम गण परिषद (एजीपी) में हुआ करते थे। वह 52 साल के हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है। 



ममता बनर्जी 

अगर किसी महिला ने भारतीय राजनीति में अपनी खास जगह बनाई है तो वो हैं ममता बनर्जी। काफी विरोध झेलने के बाद भी ममता बनर्जी की पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सभी पार्टियों को पस्त कर दिया।ममता बनर्जी भी अविवाहित हैं। वह सार्वजनिक मंचों से यह कहती रही हैं उन्होंने अपना जीवन पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए समर्पित किया है और अपने बारे में सोचने का उनके पास समय नहीं है। 




जयललिता


अभिनेत्री से नेता बनीं जे जयललिता चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी हैं। उन्होंने राजनीति में हमेशा अपने अविवाहित होने को प्रचारित किया और डीएमके के शासन को करुणानिधि के परिवार का शासन बताती रहीं।
जे जयललिता किसी राजनीतिक परिवार में पैदा नहीं हुईं और उन्होंने एआईएडीएमके पार्टी की सेवा करते हुए राजनीति में अपना मुकाम हासिल किया है। वह कठोर निर्णय लेने के लिए जानी जाती हैं।जयललिता मौके की राजनीति करने के लिए जाती हैं। पार्टी हितों को देखते हुए कभी वो एनडीए का हिस्सा रहीं तो राजनीतिक समीकरण बिगड़ते ही उससे अलग भी हो गईं।
हालाकिं करीब ढाई महीने से अस्पताल में भर्ती तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता का निधन 5 दिसंबर 2017 को हो गया


अटल बिहारी वाजपेयी 

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के काफी प्रभावशाली नेता रहे हैं। उन्होंने शादी नहीं की। वह संसद के लिए नौ बार चुने गए और पहले ऐसे गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। वह 1996 में पहली बार पीएम बने लेकिन सरकार सिर्फ 13 दिन चली।इसके बाद वह 1998 में पीएम बने तो उनकी सरकार 13 महीने चली। वह 1999 में तीसरी बार पीएम बने तो 2004 तक बने रहे।



मायावती

भारतीय राजनिति की 'दलित क्वीन' मायावती बहुजन समाज पार्टी की बहुत प्रभावशाली नेता हैं। अपने मेंटर कांशीराम के साथ मिलकर काम करते हुए उन्होंने अपनी रणनीतियों से बीएसपी को यूपी में सत्ता में ला दिया और अभी भी उसे सत्ता में लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। वह देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की पहली दलित मुख्यमंत्री बनीं और चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उन्होंने शादी नहीं की।पार्टी कैडर के बीच उन्होंने अपनी खासी पकड़ बनाई है। यहां तक कि दलित नेता होने के बावजूद सवर्णों के बीच पैठ बनाने में भी वो कामयाब रही हैं।



उमा भारती 

साध्वी उमा भारती बीजेपी की फायर ब्रांड नेता हैं। अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह लाइमलाइट में आईं। उन्होंने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया और वह केंद्र में कैबिनेट मिनिस्टर भी रही हैं।वह भारतीय जनता पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करने के लिए पार्टी से निकाली गई थीं। इसके बाद वह 2011 में बीजेपी में लौट 
आईं।फिलहाल उमा भारती भारत की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री है। 



मनोहर लाल खट्टर

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट‌्टर ने भी शादी नहीं की है। साठ वर्षीय खट्टर 35 साल तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता रहे हैं। 1977 में 24 वर्ष की आयु में उन्होंने आरएसएस का झंडा उठा लिया था। खट्टर ने अपना जीवन आरएसएस के माध्यम से देश की सेवा को समर्पित कर दिया।



नवीन पटनायक
नवीन पटनायक बीजू जनता दल के अध्यक्ष हैं और वर्ष 2000 से ओडिशा के मुख्यमंत्री हैं। वह ओडिशा के दिवंगत प्रसिद्ध नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के बेटे हैं।नवीन सार्वजनिक मंच से खुद को अविवाहित बताते हुए अपने वोटर्स से कहते रहे हैं कि कांग्रेसियों की तरह उनका कोई परिवार नहीं है इसलिए उनकी सत्ता के दौरान किसी परिवारवाद पर आधारित शासन का खतरा नहीं है। 


अनिल विज
हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य और खेल मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे अनिल विज काफी लोकप्रिय नेता माने जाते है।विपक्ष से लेकर भ्रष्टाचारी अधिकारी गबर के नाम से खौफ खाते है।विज अकेले ऐसे नेता माने जाते है जो खुद की सरकार के खिलाफ बोलने से भी नहीं हिचकते है।अनिल विज ने शादी नहीं की और वे 63 साल के है।


सोनू शर्मा की कलम से
सीनियर प्रोड्यूसर
ख़बर फास्ट






शुक्रवार, 27 मई 2016

हरियाणा के 2और छोरो ने बॉलीवुड में की धमाकेदार एंट्री

(हरियाणा) सोनू शर्मा
रणदीप हुड्डा, सुनील ग्रोवर, मल्लिका सेहरावत,परिणति चौपड़ा, ओमपुरी,जूही चावला, सोनू निगम के बाद अब हरियाणा से बॉलीवुड तक का सफ़र करने वालों की लिस्ट में दो और नाम जुड़ गये है।ये नाम है आकाश चावरिया और संदीप भारद्वाज। रागोपाल वर्मा कुख्यात चन्दन तस्कर पर किलिंग फिल्म वीरप्पन बना रहे हैं।इसमें आकाश वीरप्पन के राइट हैंड का रोल करते दिखेंगे। वीरप्पन का रोल निभाने वाले आकाश चावरिया मूल रूप से रोहतक के पटेल नगर के रहने वाले है। एक्टिंग की वजह से वे अब मुंबई में भी रहते हैं। बता दें कि आकाश ने हरियाणा की ही स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स में बाकायदा एक्टिंग का कोर्स किया है।वे बॉलीवुड में करियर बनाने के लिए सितंबर 2015 में मुंबई चले गए।इसी दौरान रामगोपाल की इस फिल्म के लिए ऑडिशन चल रहा था, आकाश ने भी ऑडिशन दिया।उन्हें फिल्म में वीरप्पन की गैंग के डाकू के रोल के लिए सिलेक्ट कर लिया गया।बता दे की आकाश मिडिल क्लास फैमिली से हैं और उनके पिता की मौत हो चुकी है।वीरप्पन के अलावा आकाश की एक और फिल्म आने वाली है, इसमें वे मोहम्मद खालिद का किरदार निभाते नजर आएंगे।यह फिल्म रेड लाइट एरिया पर बेस्ड है और साल के अंत तक रिलिज हो सकती है।













वहीं भिवानी के मुढांल गांव के रहने वाले संदीप भारद्धवाज भी बड़े पर्दे की इस फिल्म में नजर आएंगे। वीरप्पनमें भिवानी के गांव मुंढालकलां का यह लाडला मुख्य कलाकार कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन की भूमिका में नजर आएगा।यह फिल्म कन्नड़ और तेलगू में दक्षिण भारत में बड़ा नाम कमा चुकी है। दक्षिण भारत में यह कलाकार सर्वश्रेष्ठ कलाकार का अवार्ड पा चुका है। अपने फिल्मी दुनियां में कदम रखने के बारे में संदीप बताते हैं कि उन्होंने आगरा कालेज से आर्ट से पेंटिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। वहीं से थिएटर करने की रुचि जगी। वर्ष 2008 में वह दिल्ली आ गया। थिएटर हस्तियों के साथ गुर सीखे। उसने इस दुनियां में पैर जमाने के लिए करीब 150 फिल्मों के आडिशन दिए। फिल्म वीरप्पनके लिए रामगोपाल वर्मा को उसका चेहरा पसंद आ गया। मेरी तस्वीर मंगवाई गई उस पर वीरप्पन की मूंछें लगाई जो उनको जंच गई और उसे वीरप्पन की भूमिका दे दी गई। अब वीरप्पन के रूप में वह फिल्म में सबके सामने हैं। उनके अलावा लीजा रहे, उषा जाधव, आकाश चावड़िया काम कर रहे हैं। इस फिल्म में कुख्यात चंदन तस्कर के जीवन की कहानी दिखाई गई है।बता दे की वीरप्पन फिल्म आज रिलीज हो गई है।




रविवार, 21 फ़रवरी 2016

आरक्षण की आग में हरियाणा।रास्ते हुए बंद, लोग हुए तंग।

हरित प्रदेश को लहूलुहान होने से बचाइए
देश को आखिर वो दिन देखना पड़ा, जिसका डर था। नेतृत्वविहीन आंदोलन जातीय संघर्ष में तब्दील हो गया। आरक्षण की मांग पीछे छूट गई। प्रदेश अराजकता और अहंकार की आग में जल रहा है। रोहतक ने तीन लाल खो दिए। सरकार का धैर्य भी जवाब दे गया। शाम होते-होते आठ जिलों में सेना बुला ली गई। बेकाबू भीड़तंत्र यह नहीं समझ पा रहा कि सरकार से शुरू हुई उसकी लड़ाई प्रदेश के अपने ही भाईचारे के खिलाफ चली गई है। जितना आरक्षण से हासिल नहीं होना, उससे कहीं ज्यादा नुकसान हमने अपनी ही संपत्ति का कर लिया। भाईचारे को नफरत की भेंट चढ़ा दिया। आंदोलन की चिंगारी सुलगाने वालों ने प्रदेश को जलता छोड़कर चुप्पी ओढ़ ली है। कोई बचाने नहीं रहा। राजस्थान के गुर्जरों और गुजरात के पाटीदारों के आंदोलन का हश्र देखने के बावजूद उनकी चेतना नहीं जागी। इतिहास गवाह है कि जिन आंदोलनों में जनता की सहानुभूति नहीं होती या फिर जनता का नैतिक समर्थन नहीं होता, वे आंदोलन पिछड़ जाते हैं। यह बात शायद आंदोलन की आड़ में अराजक हुई भीड़ समझ नहीं पा रही है। यह केवल एक मांग है- जो शांतिपूर्ण तरीके से भी मनवाई जा सकती है। फिर विरोध का बीड़ा उठा भी लिया तो बातचीत के लिए नेतृत्व का होना बेहद जरूरी था। सरकार भी आखिर किससे बात करे। उपद्रवियों का तो कोई चेहरा होता ही नहीं। हालांकि सरकार समय रहते तो गैर जरूरी बयानबाजी रोक पाई और ही आंदोलन इतना उग्र हो जाएगा, इसका अंदाजा लगा पाई।
अब भी वक्त है। हमारे हरियाणा का सामाजिक आर्थिक ताना-बाना तहस-नहस हो, उससे पहले हमें इस आग को बुझाने के जतन करने होंगे। हरियाणा के हितों में अक्सर बड़ा फैसला सुनाने वाली और बड़े मुद्दों का समाधान करने वाली खापों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। वे तय करें कि आंदोलन मांग मनवाने के लिए हो रहा है या फिर प्रदेश के भाईचारे के खिलाफ। सवाल उन नेताओं पर भी उठेंगे, जो वोट बैंक की राजनीति के लिए चुपचाप प्रदेश का भाईचारा बिगड़ते देख रहे हैं। वे चाहते तो क्या मजाल कि प्रदेश यूं जंग का मैदान बन जाता। ऐसा भी नहीं है कि उनकी बात कोई नहीं सुनता। आंदोलन की आड़ में प्रदेश को जला रहे लोग यह क्यों भूल रहे हैं कि हाल ही में मौसम की मार झेल चुके किसानों के जख्म अभी भरे भी नहीं हैं कि हमने नए घाव दे दिए। प्रदेश के अधिकांश किसान कर्ज की मार झेल रहे हैं। ऐसे में यह अराजकता हरियाणा के आर्थिक ढांचे को जिस तरह से तहस-नहस कर रही है, उसका खामियाजा हमें ही भुगतना है। सियासतदानों को नहीं। जिस हरियाणा को प्रदेश के मेहनतकश किसानों ने कड़ी मेहनत से हरितक्रांति की कतार में खड़ा किया, उसे लहूलुहान होने से बचाइए। यह जिम्मा उन सभी का है, जो आंदोलन के समर्थन या विरोध में है। ये वक्त अभी सियासी बयान जारी करने का नहीं और ही इस हद तक हठ करने का कि आंदोलन हमारे अपनों की ही जान लेने पर अामादा हो जाए। यह वक्त अफवाहों को दरकिनार करने का है। हरियाणा को शांति की जरूरत है। हरियाणा बचेगा तभी किसी आरक्षण का कोई मतलब रहेगा। वरना ऐसे आंदोलन सिर्फ उपद्रव ही कहलाते हैं।